प्रत्येक वर्ष 4 फरवरी को ‘मराठा लाईट इन्फेंट्री डे’ के रूप में मनाया जाता है। इस वर्ष भी यह दिवस रेजिमेंट ने धूमधाम से मनाया। सेना प्रमुख बिपिन रावत की मौजूदगी में विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। कहा जाता है कि 1670 में इसी दिन छत्रपति शिवाजी ने प्रसिद्ध कोंडाना किले पर कब्ज़ा किया था। इसे आज महाराष्ट्र में सिंहगढ़ किले के रूप में जाना जाता है।
रेजिमेंट की पहली बटालियन 1768 में ‘बोम्बे सिपॉय’ की दूसरी बटालियन के रूप में बनाई गई थी। जिसे बाद में तीसरी ‘जंगली पलटन’ के रूप में परिवर्तित कर दिया गया।
मिल चुके हैं दो ‘विक्टोरिया क्रॉस’
मराठा लाइट इन्फेंट्री के दो सैनिकों-यशवंत घाडगे तथा ‘सिपॉय’ नामदेव जाधव को ब्रिटिश समय के सर्वोच्च सम्मान ‘विक्टोरिया क्रॉस’ से सम्मानित किया जा चुका है। इसके आलावा रेजिमेंट को अभी तक ढेरों वीरता पुरस्कार मिल चुके हैं।
लाइट इन्फैंट्री‘ का ख़िताब पाने वाली पहली रेजिमेंट
1841 में अफगान युद्ध के दौरान ‘लाइट इन्फैंट्री’ का खिताब हासिल करने वाली सेना की पहली इन्फैन्ट्री रेजिमेंट भी थी। यह 56 Battle honours और 10 Theatre Honours प्राप्त कर चुकी है। यह भारतीय सेना की सबसे पुरानी और सबसे सुसज्जित रेजिमेंटों में से एक है। मराठा लाइट इन्फैंट्री की वीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इस रेजिमेंट ने प्रथम विश्व युद्ध में 15 युद्ध सम्मान हासिल किए।
दूसरे विश्व युद्ध में, रेजिमेंट की ताकत 6 से बढ़ाकर 13 बटालियन कर दी गई। आज रेजिमेंट में करीब 21 नियमित बटालियन, चार राष्ट्रीय राइफल्स बटालियन और दो क्षेत्रीय सेना बटालियन हैं। मराठा लाइट इन्फैंट्री एकमात्र रेजिमेंट है जिसने भारतीय सेना के लिए विशेष बलों की दो बटालियनों का योगदान दिया है।
रेजिमेंट में 10 मैकेनाइज्ड इन्फैंट्री रेजिमेंट, दो आर्टिलरी (तोपखाने) रेजिमेंट और सेना में एक पैराशूट (हवाई रक्षा) रेजिमेंट के साथ संबद्धता है। यही नहीं रेजिमेंट में भारतीय नौसेना पोत (आईएनएस) मुंबई, 20 वीं स्क्वाड्रन वायु सेना (सुखोई) और दमन और दीव में भारतीय तटरक्षक वायु स्टेशन के साथ एक अंतर-सेवा संबद्धता भी है।
मराठा लाइट इन्फैंट्री रेजिमेंट’ 250 वर्षों युद्ध के मैदान में वीरता के झंडे गाड़ती रही है। यह छत्रपति शिवाजी और मराठा योद्धाओं से अपनी प्रेरणा लेकर आए हैं जो गुरिल्ला युद्ध में निपुण थे |
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें